ड्रोन स्प्रेइंग से धान की फसल बचाई 

04.07.26 07:40 AM - By Roopal Sehgal

ड्रोन स्प्रे ने बदल दी किसान नरेश कुमार की सोच – जब 10 लीटर पानी ने 200 लीटर से बेहतर परिणाम दिए

क्या सिर्फ 10 लीटर पानी से पूरी एकड़ की फसल में दवा असर कर सकती है?"

यही डर हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के कुमोदा गांव के किसान नरेश कुमार के मन में था। उनकी धान की फसल में बीमारी तेजी से फैल रही थी और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।

तभी उनके पड़ोसी किसान, जो पिछले 2–3 वर्षों से नियमित रूप से हमारी टीम से ड्रोन स्प्रे करा रहे थे, उन्होंने नरेश कुमार को भी एक बार ड्रोन स्प्रे आज़माने की सलाह दी।

नई तकनीक पर भरोसा करना आसान नहीं था। इसलिए नरेश कुमार ने पूरा जोखिम लेने के बजाय 10 एकड़ में से सिर्फ 5 एकड़ में ड्रोन स्प्रे कराया और बाकी 5 एकड़ में पहले की तरह पारंपरिक तरीके से दवा का छिड़काव कराया। करीब 4–5 दिन बाद जब उन्होंने दोनों खेत देखे, तो अंतर साफ दिखाई दे रहा था। ड्रोन से स्प्रे किए गए खेत में बीमारी काफी हद तक रुक चुकी थी और पौधे पहले से ज्यादा स्वस्थ दिख रहे थे। वहीं, दूसरे खेत में बीमारी अभी भी बनी हुई थी। यह देखकर नरेश कुमार ने तुरंत बाकी 5 एकड़ में भी ड्रोन स्प्रे करवा दिया। लेकिन उनके मन में एक सवाल था—"जब दोनों जगह एक ही दवा डाली गई, तो ड्रोन से इतना अच्छा परिणाम कैसे मिला?" हमारे कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि ड्रोन बहुत बारीक बूंदों के रूप में दवा का छिड़काव करता है। साथ ही, ड्रोन के प्रोपेलर से बनने वाली हवा दवा को पौधों के अंदर तक भी पहुँचा देती है। इससे दवा पूरे पौधे पर अच्छी तरह फैलती है और बीमारी पर बेहतर असर करती है।

अगर 10 लीटर पानी काफी है, तो 200 लीटर पानी की सलाह क्यों दी जाती है?


यही सवाल नरेश कुमार ने हमारी टीम से भी पूछा।
हमारे विशेषज्ञों ने बताया कि 200 लीटर पानी की सलाह दवा के असर के लिए नहीं, बल्कि किसान की सुरक्षा के लिए दी जाती है। पारंपरिक स्प्रे में किसान खुद दवा की टंकी लेकर खेत में चलता है, इसलिए ज्यादा पानी मिलाकर दवा को पतला किया जाता है, ताकि उसके सीधे संपर्क से होने वाले जोखिम कम रहें।
वहीं, ड्रोन स्प्रे में ऑपरेटर सुरक्षित दूरी से ड्रोन उड़ाता है। उसे दवा के सीधे संपर्क में नहीं आना पड़ता। इसी वजह से सही मात्रा में दवा के साथ कम पानी में भी प्रभावी और सुरक्षित स्प्रे किया जा सकता है। आज नरेश कुमार का कहना है कि पहले उन्हें इस तकनीक पर भरोसा नहीं था, लेकिन अपनी ही फसल में मिले परिणामों ने उनकी सोच बदल दी। अब वे मानते हैं कि सही समय पर किया गया ड्रोन स्प्रे फसल की बेहतर सुरक्षा के साथ समय और मेहनत—दोनों की बचत करता है।



Roopal Sehgal